Tap to Read ➤

Purushottam Das Tandon: एक संक्षिप्त परिचय पुरुषोत्तम दास टंडन

राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के लिए ही नहीं बल्कि कई कारणों से जाने जाते हैं। एक समर्पित राजनयिक, कुशल वक्ता, बेबाक पत्रकार, कवि, लेखक, समाज सुधार और समाज सेवी भी थे।
Varsha Kushwaha
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Lorem ipsum dolorटंडन भारत के लिए सिर्फ स्वतंत्रता ही नहीं चाहते थे बल्कि उसके लिए पूरी तरह से समर्पित भी थे। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन की और भारत के कल्याण से जुड़े कार्य करने शुरू किए।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
1906 में वकालत का अभ्यास शुरू करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
उनके समर्पण और लगन की वजह से गांधी जी उन्हें प्रेम से राजर्षि कहते थे।
1908 में वह जुनियर के तौर पर प्रमुख वकील तेज बहादुर सप्रू के साथ काम करने लगे और इसके साथ उन्होंने जलियांवाला बाग कांड का अध्ययन करना शुरू किया।
1920 में हुए असहयोग आंदोलन में पुरुषोत्तम दास टंडन ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। 1921 में उन्होंने कानून का अभ्यास छोड़ अपना पूरा ध्यान राजनीति और स्वतंत्रता संग्राम पर केंद्रित कर दिया।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
साल 1930 में सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन में अपनी भागदारी के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
1934 में पुरुषोत्तम दास टंडन को बिहार में प्रांतिय किसान अध्यक्ष के तौर पर चुना गया। अध्यक्ष के तौर पर चुने जाने के बाद उन्होंने कई किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया।
1946 में उन्हें भारतीय संविधान सभा के लिए चुना गया और इसी के साथ वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में बतौर अध्यक्ष 13 साल (1947 से 1950) तक बने रहे।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
पुरुषोत्तम दास टंडन ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए 1948 में चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें पट्टाभी सीतारमैया से हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 1950 में दो साल बाद उन्होंने आचार्य कृपलानी को मात देकर कांग्रेस के नागपुर सत्र का नेतृत्व करने का स्थान हासिल किया।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
पुरुषोत्तम दास टंडन ने 1930 में नो टैक्स अभियान की शुरुआत की थी, जिसकी सरहाना नेहरू जी ने की थी। पुरुषोत्तम दास टंडन कभी सत्ता के भुखे नहीं थे। वह सरदार वल्लभभाई पटेल को सच्चे नायक के तौर पर देखते थे।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में अपनाने की वकालत की। उन्होंने देवनागरी लिपि पर जोर दिया और उर्दू लिपि के साथ अरबी और फारसी वाले शब्दों को अस्विकार करने की बात पर जोर देते हुए बगावत भी की।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें