Pompa Sen       Aug 04, 2023

धर्म, संस्कृति और सम्मान के लिए अंतिम सांस तक लड़ते रहें ये राजपुत शासक 

राजपूत राजाओं की महान शौर्य गाथा आपने अपने स्कूल या कॉलेज में इतिहास की किताबों में अवश्य पढ़ी होगी। 

यहां इतिहास के सबसे ताकतवर राजपूत राजाओं के बारे बताया जा रहा है, जिन्होंने धर्म, संस्कृति और राजपुतों की सम्मान व सुरक्षा के लिए कई लड़ाईयां लड़ी।

अपने धर्म और संस्कृति के प्रति दृढ़ गौरव के लिए जाने जाने वाले बप्पा रावल गहिलोत वंश के 8वें शासक थे। उन्होंने अरब आक्रमणकारियों से लड़ाई की और उन्हें हराया।

बप्पा रावल

राणाकुम्भा 1433 से 1468 के बीच मेवाड़ के शासक थे। वह सिसौदिया वंश के थे। उन्हें दिल्ली और गुजरात के शासकों द्वारा हिंदू-सुरत्राण की उपाधि दी गई थी।

राणा कुम्भा

पृथ्वीराज, चौहान वंश के शासक थे। उन्होंने 12वीं शताब्दी के दौरान भारत के उत्तरी भाग पर शासन किया। वह दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाले दूसरे अंतिम हिंदू राजा थे। 

पृथ्वीराज चौहान

राजपूतों के सबसे लोकप्रिय शासकों में से एक, राव मालदेव राठौड़ राठौड़ वंश से थे। शेरशाह के समय में मारवाड़ में राठौड़ों का बड़ा नाम था। 

राव मालदेव राठौड़

संग्राम सिंह या राणा सांगा 1509 से 1527 के बीच मेवाड़ के राजा थे। गुजरात और मालवा के मुस्लिम राजाओं के साथ उनकी लड़ाई प्रसिद्ध है। लोधियों और राणासांगा के बीच की लड़ाई का जिक्र इतिहास में सबसे अधिक है।

राणा सांगा

सबसे बहादुर और महान राजपूत राजाओं में से एक, महाराणा प्रताप के कार्य अविस्मरणीय हैं। महाराणा प्रताप सिंह ने अपना लगभग पूरा राज्य मुगलों के चंगुल से छुड़ा लिया था। 

महाराणा प्रताप

उन्हें यह बात भी पसंद नहीं थी कि कई राजपूत अपनी बेटियाँ अकबर जैसे मुगलों को दे रहे थे। उन्होंने इन समुदायों के साथ अपने समुदाय के सभी विवाहों पर प्रतिबंध लगा दिया। उन्हें वे राजपूत नहीं मानते थे। 

1597 ई. में उनकी मृत्यु हो गई और उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र अमर सिंह को मुगलों के लगातार हमलों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने संघर्ष किया। उन्होंने मुगलों से लगभग 17-18 युद्ध लड़े।

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