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15 August Special: भगत सिंह के गुरु करतार सिंह की कहानी

करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई, 1896 को अविभाजित पंजाब के लुधियाना के पास स्थित सराभा गांव में हुआ था और भगत सिंह इन्हें अपना गुरु मानते थे।
Narender Sanwariya
Indian Freedom Fighter
भारत के आजादी की लड़ाई में जिन योद्धाओं ने अपने प्राण न्योछावर किए उनके विषय में हम हर दिन हर समय सुनते रहते हैं। लेकिन कई योद्धा ऐसे भी हैं जिनके विषय में अधिक लोग नहीं जानते और वे आज तक गुमनामी में ही रह गए।
इन योद्धाओं के विषय में हम किताबों में बेहद कम पढ़ पाते हैं। उन्हीं योद्धाओं में से एक हैं करतार सिंह सराभा। करतार सिंह ने केवल 19 साल की उम्र में ही उन्होंने अपने प्राण गवां दिए। आइए करतार सिंह के जीवन के विषय में जानते हैं।
भगत सिंह करतार सिंह को आइडियल मानते हैं। ये माना जाता है कि जब भगत सिंह को गिरफ्तार किया गया था तो उनके पास करतार सिंह सराभा की तस्वीर मिली थी।
Bhagat Singh
करतार सिंह का जन्म पंजाब के लुधियाना जिले के सराभा गांव में 24 मई 1896 को हुआ था।
करतार ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया था उसके बाद उनका पालन पोषण दादा ने किया था।
Kartar Singh
उनकी प्रारंभिक शिक्षा लुधियाना से ही हुई थी। वे पढ़ने में होशियार थे यही कारण था कि उन्हें पढ़ने के लिए अमेरिका भेजा गया था।
Independence Day Special
1912 में जब वे अमेरिका पहुंचे तब वे 15 साल के हो गए थे। जब वे पढ़ रहे थे तब वे अपने गांव के एक युवक के साथ ही रहे।
हालांकि वे अमेरिका पढ़ने आए थे लेकिन भारत में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने की चाह करतार में पनपता रहा।
15 August
इसका परिणाम यह रहा कि उनका अमेरिका में बसे भारतीयों के बीच दब-दबा बढ़ता रहा।
Independence Day
1915 में गदर पार्टी स्थापना हुई जिसमें यह निर्णय लिया गया कि कनाडा और अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को अपनी सुख सुविधाएं छोड़कर भारत की आजादी में अपना सहयोग देने के लिए भारत जाएंगे।
इस आवाहन के बाद करीब 8 हजार भारतीय समुद्री जहाजों से भारत पहुंचे। जब करतार सिंह भारत आए तो उन्हें सलाह दी गई कि वे भारत छोड़कर कहीं और चले जाएं नहीं तो उन्हें पकड़ लिया जाएगा।
लेकिन उन्होंने अपना विद्रोह जारी रखा और उन्हे मात्र 19 वर्ष की आयु में पकड़ लिया गया और फांसी दे दी गई।
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