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स्वतंत्रता दिवस 2022: बिरसा मुंडा के जीवन से जुड़े 10 तथ्य

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 में हुआ था। वह एक युवा स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता थें।
Varsha Kushwaha
बिरसा मुंडा ने 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था।
Independence Day
बिरसा, मुंडा नामक जनजाति का हिस्सा है और एक स्वतंत्रा सेनानी के तौर पर उन्होंने आपना पूरा बजपन छोटानागपुर पठार में बिताया था।
1890 के दशक के दौरान से उन्होंने अंग्रेजों द्वारा किए गए शोषण के बारे में अपने लोगों से बात करनी शुरू की।
Birsa Munda
बिरसा ने 1894 में अंग्रेजों और दीकुओं (बाहरी लोगों) के खिलाफ घोषणा की और इस तरह मुंडा उलगुलान (विद्रोह) शुरू हुआ।
बिरसा ने आदिवासी लोगों को मिशनरियों से दूर रखने और अपने पारंपरिक तरीकों पर लौटने की वकालत की। उन्होंने लोगों से टैक्स न देने की भी अपील की।
Independence Day
1899 में उन्होंने लोगों के साथ मिलकर अपना सशस्त्र संघर्ष फिर से शुरू किया। उन्होंने पुलिस थानों, सरकारी संपत्ति, गिरजाघरों और जमींदारों के घरों को तोड़ दिया।
1899 में बिरसा मुंडा ने रांची के दक्षिण में एक विशाल आदिवासी आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन को 'उलगुलान' के नाम से जाना गया।

Freedom Of Speech
1890 के दशक की शुरुआत में भारत पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के लिए उन्होंने ब्रिटिश कंपनी की योजनाओं के बारे में आम जनता में जागरूकता फैलाना का काम शुरू किया।
Independence Day
1900 में जामकोपई जंगल, चक्रधरपुर में पकड़ा। 9 जून 1900 को रांची जेल में बिरसा मुंडा की मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी मृत्यु हैजे की वजह से हुई थी।
इस क्रांतीकारी को सम्मानित करने के लिए कई संस्थानों/कॉलेजों और स्थानों के नाम को उनके नाम पर रखा गया है।
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