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स्वतंत्रता दिवस 2022: अरुणा आसफ अली के जीवन से जुड़े 10 तथ्य

स्वतंत्रता संग्राम से अपने योगदान के लिए ग्रैंड ओल्ड लेडी के नाम से जाने जाने वाली अरूणा आसफ अली का जन्म 16 जुलाई 1909 कालका हरियाणा ब्रिटिश इंडिया में एक बंगाली ब्राहमिण परिवार में हुआ था।
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वह एक शिक्षक और राजनीतिक कार्यकर्ता थी। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन और भूमिगत आंदोलन मे अपना योगदान दिया था।
उनकी बाहदुरी और समर्पण के लिए उन्हें नायिका और ग्रैंड ओल्ड लेडी की उपाधि दी गई।
अरुणा आसफ अली नें बीए की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने कलकत्ता के गोखले मेमोरियल स्कूल में एक शिक्षिका के तौर पर काम किया था।
उसके बाद उनकी मुलाकात आसफ अली से हुई। जो इलाहाबाद में कांग्रेस पार्टी के नेता थे। अरुणा ने आसफ अली से शादी करने की इच्छा जताई।
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धर्म और उम्र में 20 साल का फर्क होने की वजह से उनके माता-पिता इस शादी के खिलाफ थे। लेकिन फिर भी माता-पिता के खिलाफ जाके 1928 में उन्होंने आसाफ अली से शादी की।
अरुणा आसफ अली ने 9 अगस्त को गोवालिया टैंक मैदान में काग्रेंस का झंडा फहराया।
उनके इस कदम ने इस आन्दोलन की शुरूआत को मार्क किया। 1942 के आन्दोलन के दौरान उनकी बाहदुरी के लिए उन्हें नायिका का दरजा दिया गया।
1942 में भूमिगत आंदोलन की शुरूआत हुई और उसी दौरान राम मनोहर लोहिया के साथ मिलकर उन्होंने कांग्रेस पार्टी की मासिक पत्रिका का संपादन किया जिसका नाम "इंकबाल" था।
1944 में आए पत्रिका के एक अंक में उन्होंने देश के सभी युवाओं से हिंसा-अहिंसा की बातों को भूला कर क्रांति में शामिल होने को कहा।
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों से परेशान होकर ब्रिटिश सरकार ने अरुणा आसफ अली को पकड़ने के लिए 5000 रुपये का इनाम तक रखा था।
वर्ष 1958 में अरुणा आसफ अली दिल्ली की पहली मेयर चुनी गईं। 29 जुलाई 1996 को 87 वर्ष की आयु में अरुणा आसफ अली ने आखिरी सांस ली।
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