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अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

सीमा शुल्क एक तरह की एजेंसी है जिसका कार्य माल के प्रवाह को नियंत्रित करना होता है। इस दिवस को सर्वप्रथम 1983 में मनाया गया था और इसकी शुरुआत यूरोपीयन देशों द्वारा की गई थी। आइए इस दिवस के बारे में जाने-
Varsha Kushwaha
अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत 1983 में सीमा शुल्क सहयोग परिषद द्वारा की गई थी जिसे आज विश्व सीमा शुल्क संगठन कहा जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस, 26 जनवरी 1953 में सीमा शुल्क सहयोग परिषद (आज का विश्व सीमा शुल्क संगठन) की स्थापना के दिन को चिन्हित करने के लिए मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को कस्टम अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका के बारे में जागरूक करना और साथ ही कस्टम अधिकारियों द्वारा कर्तव्यों का पालन करने में सामने आई विभिन्न चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है।
दुनिया के विभिन्न स्थानों पर इस दिवस के महत्व को दर्शाने के लिए सेमिनार,भाषण और बहस आदि जैसे निम्नलिखित कार्यक्रमों का आयोजित किया जाता है। और प्राधिकरण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अधिकारियों की सराहना करने के लिए कर्मचारी प्रशंसा कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस की स्थापना सीमा शुल्क सहयोग परिषद की 30 वर्षगांठ पर की गई थी।
वर्ष 1994 में सीमा शुल्क सहयोग परिषद (सीसीसी) के नाम में बदलाव किया और इसका नया नाम विश्व सीमा शुल्क संगठग रखा गया।
विश्व सीमा शुल्क संगठग का मुख्यालय बेल्जियम में है और वर्तमान में दुनिया के 183 देश इसके सदस्य हैं।
विश्व सीमा शुल्क संगठन का कार्य सकुशल और सुरक्षित विश्व व्यापार प्रबंधन को सुनिश्चित करना है और माल के प्रवाह को सुचारू रूप से चलाना है। ये एक ऐसा रीति-रिवाज है जिसके माध्यम से देशों के बीच संबंधों की स्थापना होती है।
हर साल इस एक नई थीम के साथ मनाया जाता है, 2022 में इस दिवस की थीम थी "डाटा संस्कृति को अपनाकर और डाटा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते सीमा शुल्क डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देना"
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