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Guru Nanak Jayanti 2022: गुरु नानक जी के जीवन से जुड़े तथ्य

हर साल गुरु पर्व या प्रकाश पर्व गुरु नानक जी की जयंती के रूप में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। गुरु नानक देव की 553 वीं जयंती पर जानिए उनके जीवन से जुडें कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में।
Varsha Kushwaha
गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 में राय भोई तलवंडी में हुआ था। जो आज ननकाना साहिब, पाकिस्तान का हिस्सा है।
बचपन में जेनऊ धारण करने से साफ इंकार करते हुए उन्होंने तर्क दिया की ये एक धागा है जो टुट सकता है, जल सकता है, गंदा हो सकता है और खो सकता है। उन्होंने आगे कहा की अपनी सुरक्षा के लिए वह भगवान का सच्चा नाम अपने दिल में धारण करेंगे।
गुरु नानक देव बचपन से ही भगावान की प्रकृति पर चर्चा किया करते थें और वह अक्सर ही पवित्र पुरुषों के साथ लंबी चर्चा में शामिल हुआ करते थें।
सात साल की उम्र में स्कूली पढ़ाई के दौरान वर्णमाला के पहले अक्षर के वर्ण एक सीधा स्ट्रोक था जिसे गुरु नानक जी ने एक ईश्वर और एकात के रूप में वर्णित किया।
12 वर्ष की आयु में उनके पिता ने वाणिज्य सीखाने के मकसद से उन्हें 20 रुपये दिए और व्यवसाय करने के लिए कहा। उन पैसों से भोजन खरीद उन्होंने गरीबों और संतों में बांट दिया था। व्यवसाय के बारे में पिता के पूछे जाने पर उन्होंने सच्चा व्यवसाय किये जाने का उत्तर दिया।
जिस स्थान पर गुरु नानक जी ने गरीबों को भोजन करवाया था उस स्थान पर गुरुद्वारे की स्थापना की गई और उसका नाम सच्चा सौदा रखा गया है।
गुरु नानक जी ने भारत और मिडल ईस्ट की यात्रा के दौरान काजी ने गुरु नानक जी को काबा मस्जिद की ओर पैर कर सोते देख गुस्सा जाहिर किया। इसके उत्तर में उन्होने कहा कि पैरों को उस दिशा में मोड़ना संभव नहीं है जहां ईश्वर या उनका घर न हो। इसका अर्थ था की ईश्वर तो हर जगहा हर दिशा में है।
कंधारी के पानी देने से इंकार करने पर भाई मर्दानी का प्साय बुझाने के लिए गुरु नानक जी ने ईश्वर का नाम लेते हुए एक चट्टान को हटाया जहां से पानी का फव्वारा निकला। अपना पानी फव्वारह सुखता हुए देख क्रोधित कंधारी ने  चट्टान को गुरु नानक जी की ओर फेका जिसे उन्होंने अपने हाथों से रोका।
कंधारी द्वारा फेकी गई चट्टान पर गुरु नानक जी के हाथों की छाप, उस जगह पंजा साहिब के नाम से जाना जाता है। सिखों समुदाय के लिए ये सबसे पवित्र स्थान है।
गुरु नानक देव जी ने 15वीं शताब्दी में सिख धर्म की स्थापनी की। वह सिख समुदाय के प्रथम गुरु थें। उनकी सभी शिक्षाओं को गुरु ग्रंथ में एकत्रित किया गया है।
गुरु नानक जी ने मुफ्त रसोई की बात कहीं थी। जहीं सभी एक जगह बैठ कर साथ में भोजन करेगें बिना किसी भेदभाव के। आज भी इस प्रथा को हर गुरुद्वारा में निभाया जाता है।
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