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बंगाल की इन महिलाओं ने दिया आज़ादी में योगदान

जानिए बंगाल की उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने दिया देश की आज़ादी में योगदान
chailsy raghuvanshi
स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल का एक अहम योगदान रहा है। भारत की आजादी के लिए सिर्फ पुरुषों ने ही नहीं बल्कि महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कल्पना दत्ता
कल्पना दत्ता (1913-1995) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक कार्यकर्ता थी और सूर्य सेन के नेतृत्व में सशस्त्र स्वतंत्रता आंदोलन की सदस्य भी थी।
सुहासिनी गांगुली को छह साल (1932-1938) के लिए बंगाल आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत हिजली डिटेंशन कैंप में बंदी बना लिया गया था।
सुहासिनी गांगुली
अपनी रिहाई के बाद, उन्होंने भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन में भाग लिया और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महिला मोर्चा से भी जुड़ी रहीं। गांगुली ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग नहीं लिया लेकिन कांग्रेस पार्टी के अपने सहयोगियों की सहायता की थी।
सरोजिनी चट्टोपाध्याय (1879-1949) एक प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिक कार्यकर्ता और कवि थी। उन्होंने 19 साल की उम्र में पैदीपति गोविंदराजुलु नायडू से शादी की।
सरोजिनी नायडू
सरोजिनी महिलाओं की मुक्ति, साम्राज्यवाद विरोधी विचारों और नागरिक अधिकारों की भी हिमायती थी। ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष में नायडू एक प्रमुख व्यक्तित्व थी।
मातंगिनी हाजरा उन्हें प्यार से गांधी बरी या 'बूढ़ी औरत गांधी' भी कहा जाता था। हाजरा ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया और नमक अधिनियम तोड़ने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया।
मातंगिनी हाजरा
सुचेता कृपलानी
सुचेता कृपलिनी (1908-1974) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ थी।
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