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स्वतंत्रता दिवस 2022: छत्तीसगढ़ की इन महिलाओं ने दिया आजादी में योगदान

जानिए छत्तीसगढ़ की उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने दिया आजादी में योगदान
chailsy raghuvanshi
छत्तीसगढ़ी महिलाएं ऐसी थी जो कि पारिवारिक के साथ-साथ देश की आजादी की भी जिम्मेदारियों को वीरता और साहस के साथ उठा रही थी।
डॉ राधा बाई छत्तीसगढ़ में एक जाना पहचाना नाम है। इनके नाम पर राज्य में महिलाओं का कॉलेज भी स्थित है। डॉ राधा बाई एक स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, समाज सुधारक थी।
राधा बाई
राधा बाई सभी स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेती थी। राधा बाई का जन्म नागपुर में 1875 में हुआ था। इन्होंने वेश्यावृत्ती में लगी बहनों को मुक्ति दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।
राधा बाई ने अस्पृश्यता के विरोध में भी बहुत महत्वपूर्ण काम किए थे। जिनके लिए इनका नाम आज भी याद किया जाता है। वे धर्म-भेद नहीं मानती थी जिससे की वे भाई-दूज पर मुस्लिम भाईयों की भी पूजा करती थी। 2 जनवरी 1950 को राधाबाई का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
फूलकुंवर बाई एक स्वतंत्रता सेनाानी थी इनके पति भिभोंरि गांव के पटवारी थे। इनके पति का नाम रघुनाय दयाल श्रीवास्तव था जिनसे इन्हें दो बेटियां वे तीन बेटे थे।
फूलकुंवर बाई
महात्मा गांधी से मिलने के बाद फूलकुंवर बाई और उनके बेटे मनोहर काफी प्रभावित हुए और देश की आजादी के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हो गए।
केकती बाई बघेल एक सत्याग्रही महिला थी। जिन्होंने अपने बेटे को देश की आजादी लड़ने के लिए प्रेरित किया था। केकती बाई ने राधा बाई के साथ स्वंत्रता आंदोलन में भाग लिया और अस्पृश्यता के विरोध में अपने कदम उठाए।
केकती बाई
रोहिणी बाई 10 साल की उम्र में ही राधा बाई की टोली में जुड़ गई थी और स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने लग गई थी। जिसके कारण इन्हें मात्र 12 साल की उम्र में ही जेल जाना पड़ा था।
रोहिणी बाई
अल्लूरी सीताराम राजू