Tap to Read ➤

स्वतंत्रता दिवस:अरुणाचल प्रदेश की इन महिलाओं ने दिया आज़ादी में योगदान

जानिए अरुणाचल प्रदेश की उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने दिया था आज़ादी में योगदान
chailsy raghuvanshi
अरुणाचल प्रदेश को पहले नॉर्थ ईस्टर्न फ्रंटियर एजेंसी के नाम से जाना जाता था, जिसे "उगते सूरज की भूमि" कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं अरुणाचल प्रदेश की महिला स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में।
भोगेश्वरी फुकानानी ब्रिटिश राज के दौरान एक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन कार्यकर्ता थी, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी प्राण तक कुर्बान कर दिए थे।
भोगेश्वरी फुकानानी
फुकानानी का जन्म 1885 में असम के नागांव जिले में हुआ था। उनका विवाह भोगेश्वर फुकन नामक व्यक्ति से हुआ था जिनसे इन्हें दो बेटियां और छह बेटे थे।
गाइदिन्ल्यू एक रोंगमेई नागा आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता थीं, जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक सशस्त्र प्रतिरोध का विद्रोह किया, जो उन्हें आजीवन कारावास तक ले गया।
रानी गाइदिन्ल्यू
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें 'रानी' की उपाधि दी और उसके बाद उन्होंने रानी गाइदिन्ल्यू के रूप में स्थानीय लोकप्रियता हासिल की। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
कनकलता बरुआ को 'बीरबाला' के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में महिला स्वयंसेवकों की प्रमुख के रूप में सक्रिय भाग लिया, जिनके हाथ में राष्ट्रीय ध्वज था।
कनकलता बरुआ
बरुआ का जन्म असम के अविभाजित दरांग जिले के बोरंगबाड़ी गांव में कृष्ण कांता और कर्णेश्वरी बरुआ की बेटी के रूप में हुआ था। उनके दादा घाना कांता बरुआ दरांग में एक प्रसिद्ध शिकारी थे।
गोहपुर पुलिस स्टेशन में एक अहिंसक विरोध के दौरान ब्रिटिश पुलिस ने कनकलता बरुआ की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें