Tap to Read ➤

स्वतंत्रता दिवस 2022: महान कांतिकारी पांडुरंग महादेव बापट की जीवनी

पांडुरंग महादेव बापट भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, बापट को विविध क्रांतिकारी और गांधीवादी विचारधाराओं को संयोजने के लिए जाना जाता था
Varsha Kushwaha
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
12 नवंबर 1880 में अहमदनगर जिले के पारनेर में एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे बापट ने उच्च शिक्षा के लिए पुणे के डेक्कन कॉलेज में प्रवेश लिया। यहीं पर वह चापेकर क्लब के एक सदस्य दामोदर बलवंत भिड़े के संपर्क में आए।
पांडुरंग महादेव बापट
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
1904 में मंगलदास नाथूबाई छात्रवृत्ति हासिल करने के बाद, बापट एडिनबर्ग में हेरियट-वाट-कॉलेज में इंजीनियरिंग का अध्ययन करने के लिए इंग्लैंड चले गए।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Lorem ipsum
1908 में अलीपुर में बमबारी के लिए उन्हें 1912 में गिरफ्तार कर लिए गया। 3 साल की कैद के बाद 1915 में तिलक के स्वामित्व वाले समाचार पत्र 'महरट्टा' के सहायक संपादक के रूप में काम किया।
1921 से 1923 तक, उन्होंने पुणे में टाटा कंपनी द्वारा एक बांध के निर्माण के विरोध में मुलशी सत्याग्रह का नेतृत्व किया। यह उनका बांध विरोधी सत्याग्रह था जिसमें उन्हें सेनापति की उपाधि दी गई।
सेनापति बापट
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
मुलशी सत्याग्रह के लिए अपनी गिरफ्तारी के बाद, वे लगभग सात वर्षों तक जेल में रहे और 1931 में रिहा हुए। रिहा होने के पश्चात उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) का अध्यक्ष बनाया गया।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
1939 में उन्होंने हैदराबाद सत्याग्रह में भाग लिया। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों की सफाई भी शुरू की और खुद झाड़ू लगाकर सड़कों की सफाई की।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
15 अगस्त 1947 को बापट को पहली बार पुणे के ऊपर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराने का सम्मान मिला।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के बावजूद, उन्होंने गांधी और मुख्यधारा के कांग्रेस नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा था कि "शुद्ध सत्याग्रह न तो पूर्ण अहिंसा पर जोर देता है और न ही पूर्ण-हिंसा पर।"
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
बापट को श्रद्धांजलि के रूप में मुंबई और पुणे की दो सड़कों का नाम उनके नाम पर रखा गया। वर्ष 1977 में उनके नाम पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया था
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Add Button Text