Independence Day 2022: भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के जुड़े रोचक तथ्य
इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए जाने आजादी के बाद 1947 से 2022 तक कैसा रहा है भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का सफर
Varsha Kushwaha
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का सबसे पहला संस्करण पिंगली वेंकय्या ने किया था। इस संस्करण पर अब भारत का राष्ट्रय ध्वज आधारित है। पिंगली वेंकय्या भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे।
22 जुलाई 1947 में संविधान सभा की बैठक के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) को उसके वर्तमान स्वरूप में अपनाया गया।
29 मई 1953 में एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्ग ने एवरेस्ट की चढ़ाई पर पहली बार विजय हासिल की तो उन्होंने यूनियन जैक, नेपाल और संयुक्त राज्य के झंडे के साथ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को भी वहां फहराया।
1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा अपने पहली अंतरिक्ष उड़ान के दौरान वह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को बाहरी अंतरिक्ष में लेक गएं।
21 अप्रैल 1996 में स्क्वाड्रन लीडर संजय थापर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को उत्तरी ध्रुव पर फहराने वाले पहले भारतीय बने।
2004 में 23 दिसंबर को सर्वोच्चय न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) के तहत राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान और पूर्ण गरीमा के साथ स्वतंत्र रूप से फहराने का अधिकार नागरिक का मौलिक अधिकार है। लेकिन एक पूर्ण अधिकार नहीं है। यह एक योग्य अधिकार है। जिसे अनुच्छेद 19 (2) के तहत कुछ सीमाओं और प्रतिबंधों के अधिन किया गया है।
प्रतीक और नाम अधिनियम 1950 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान अधिनियम 1971, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के उपयोगों को सिमित करता है।
साल 2014 में 7 दिसंबर को करीब 50,000 लोगों ने मिलकर एक मानव भारतीय राष्ट्रीय ध्वज बनाया। जो कि दुनिया में सबसे बड़ा मानव ध्वज था। इसे गिनीज रिकॉर्ड में शामिल किया गया।
23 जनवरी 2016 में 293 फुट लंबे खंभे पर सबसे ऊंचा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। राष्ट्रीय ध्वज का माप 99×66 फीट था।
18 फरवरी 2016 में एमएचआरडी (MHRD) ने एक फैसला की भारत के सभी केंद्र प्रायोजित विश्वविध्यालों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। जिसे कम से कम 207 फीट ऊंचे खंभे पर लगया जाएगा।
30 दिसंबर 2021 में इंडियन फ्लैग कोड में संशोधन किया गया जिसमें कपास, ऊन, रेशम और खादी के अलावा मशीन से बने पॉलिस्टर झंडे, हाथ से कटे और बुने झंडे बनाने की अनुमति दी गई।
20 जुलाई 2022 को एक आदेश के माध्यम से संशोधन करके भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को गरीमा और सम्मान के साथ दिन रात नागरिकों के घरों में खुले में फहराने की अनुमती दी गई।