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Netaji सुभाष चंद्र बोस की शैक्षिक योग्यता क्या थी

भारत आज भारत के महान देश भक्त नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 126वीं जयंती मना रहा है। नेता की जन्म 23 जनवरी 1987 में कटक ओडिसा में हुआ था। आज उनकी 126वीं जयंती पर हम इस स्टोरी के माध्यम से आपको उनके शिक्षा के बारे में बताएं।
Varsha Kushwaha
बोस के माता-पिता का नाम जानकीनाथ बोस और प्रभावती दत्त था। बोस उनकी 9वीं संतान थे। वह कुल 14 भाई-बहन थें।
बोस ने अपनी प्ररांभिक स्कूली शिक्षा बैपटिस्ट मिशन प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल (वर्तमान का स्टीवर्ट हाई स्कूल) से प्राप्त की थी। जो कि एक यूरोपीय और एंग्लो-इंडियन स्कूल था।
अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने रेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल से बंगाली और संस्कृत की पढ़ाई भी की। इसी समय काल में वह रामकृष्ण परमहंस और स्वामीविवेका नंद के विचारों और उनकी शिक्षा के प्रभावित हुए।
1912 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया। क्योंकि वह एक प्रतिभाशाली शिक्षार्थी थे, जिनकी समझने की शक्ति किसी की तुलना में अधिक थी।
वर्ष 1913 में उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश प्राप्त किया। इस दौरान उनके 5 भाईयों ने भी उनके साथ थें। बोस ने अपनी बैचलर की डिग्री दर्शनशास्त्र में प्राप्त की।
अपनी बैचलर की डिग्री के दौरान वह उत्तर भारत यात्रा पर निकले इस दौरान टाइफाइड से पीड़ित हुए। जिसके कारण माता-पिता के साथ हुई कहा-सुनी के बाद वह वापस अपनी शिक्षा  पूरी करने कॉलेज गए।
कॉलेज के समय काल में उन्होंने अपनी डिग्री की शिक्षा के साथ डिबेट और पत्रकारिता में हिस्सा लिया। पत्रताकिरता के इस समय के ज्ञान उन्होंने आगे चल कर स्वतंत्रता संग्राम की समय में स्वाराज समाचार पत्र की स्थापने के दौरान प्रयोग किया।
प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़ा रहे ई.एफ ओटेन नामक पर हमला करने के आरोप में उन्हें कॉलेज से निष्कासित किया गया था। हालांकि बोस ने साफ शब्दों में इससे इंकार किया था।
इस घटना के बाद उन्हें जुलाई 1917 तक निष्कासित रखा गया। लेकिन उन्हें बाद में अपनी शिक्षा पूरी करने का मौका दिया गया। लेकिन उसके लिए उन्हें किसी दूसरे कॉलेज में प्रवेश लेने के सलाह दी गई थी।
घटना के बाद उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रवेश किया और आगे की बची शिक्षा पूरी कर उन्होंने 1918 में प्रथम श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
बैचलर की डिग्री प्राप्त करने के बाद उनके पिता ने बोस से भारतीय सिवल सेवा की परीक्षा की तैयारी करने के लिया कहा। अपने पिता की बात मान कर वह लंदन गए।
लंदन के इस सफर के दौरान कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने की इच्छा जागी। भारतीय साथियों और बोर्ड से मदद प्राप्त कर उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रवेश प्राप्त किया।
क्योंकि उन्होंने भारत में बीए की डिग्री प्राप्त की हुई थी इस कारण से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में मेंटल और मोरल साइंस ट्राइपोज की शिक्षा को पूरा करने की अवधि को कम करके 2 वर्ष कर दिया गया था।
मेंटल और मोरल साइंस ट्राइपोज की शिक्षा के साथ उन्होंने भारतीय सिविल सेवा की शिक्षा प्राप्त की और उसकी परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
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