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Chabahar Port : भारत के लिए चाबहार बंदरगाह का महत्व

क्या है चाबहार बंदरगाह और भारत के लिए ये बंदरगाह किन कारणों से महत्वपूर्ण है। आइए इसके बारे में जाने।
Varsha Kushwaha
चाबहार बंदरगाह समझौते के अनुसार भारत इस बंदरगाह के विकास के लिए कार्य करता है। इसके साथ कई निम्न कारणों से ये बंदरगाह भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जो इस प्रकार है-
2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक हुई और इस बैठक में चाबहार बंदरगाह समझौता किाया गया। इस समझौते मे यह तय किया गया कि भारत चाबहार बंदरगाह का विकास और संचालन करेगा। इस समझौते का पालन करते हुए इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड इस पोर्ट के विकास पर काम करता है।
चाबहार बंदरगाह का उपयोग करके भारत पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान के साथ व्यापार कर सकता है। इससे दोनों देशों के बीच बेहतर वाणिज्यिक संबंध स्थित होंगे।
पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के विकास की वजह से चीन की अरब सागर में उपस्थिति और गतिविधियों का मुकाबला करने में भारत को काफी मदद मिलेगी।
पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह जमीन से करीब 400 किलोमीटर है और चाबहार बंदरगाह से ये बंदरगाह समुद्र के रास्ते से करीब 100 किलोमीटर दूर है।
चाबहार बंदरगाह ईरान से भारत की कनेक्टिविटी में सुधार करेगा, क्योंकि ये अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSIC) का मुख्य प्रवेश बिंदु है। जो भारत को रूस, ईरान, यूरोप और मध्य एशिया के देशों के साथ भूमि, रेल और सड़क के माध्यम से जोड़ता है।
भारत द्वारा चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन के परिणामस्वरूप ईरान भारत का सैन्य सहयोगी भी बनेगा।
चाबहार बंदरगाह से व्यापार में वृद्धि होगी। कुछ आकलनों की माने तो चाबहार मार्ग आईएनएसटीसी के साथ मिलकर भारत से यूरेशिया के व्यापार को कुल 170 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ा सकता है।
चाबहार बंदरगाह रोजगार के अवसर देगा। जैसे ही बंदरगाह से जहाजों की लोडिंग और अनलोडिंग की क्षमता में वृद्धि होगी वैसे ही एस क्षेत्र में रोजगार की बढ़ौतरी होगी।
राजनयिक नजरिए से चाबहार बंदरगाह मानवीय प्रयासों के लिए एक आयोजन के तौर पर केंद्र के रूप में कार्य कर सकता है।
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