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Bhagat Singh: क्रांतिकारी भगत सिंह की दमदार शायरियां

28 सितंबर के ही दिन 1907 में भारत की इस वीर जमीन पर एक क्रांतिकारी योद्धा का जन्म हुआ था जिसे भगत सिहं के नाम से जाना जाता है। भारत को आजाद करवाना ही उनका एक मात्र उद्देश्य था। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए चाहें उनकी जान ही क्यों न चली जाए।
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इस साल भारत भगत सिंह की 115वां जन्मदिवस मना रहा है। इसके उपलपलक्ष में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में चंड़ीगढ़ एयरपोर्ट का नाम बदलकर भगत सिंह के नाम पर रखने का फैसला लिया। पंजाब में भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने पीछे न रहते हुए देश के युवाओं से इस दिन बल्ड डोनेट करने की मांग की है।
भगत सिंह ने अपने जीवन को कई शायरियों द्वारा व्यक्त करने का प्रयास किया है। आज उनके ये शायरी सुनकर नागरिक एकदम जोश से भर जाते हैं। आइए उनकी ये शायरियां आपके साथ भी साझा करें।
सीनें में जुनूं, आंखों में देशभक्ति की चमक रखता हूं दुश्मन की सांसें थम जाए, आवाज में वो धमक रखता हूं
कभी वतन के लिए सोच के देख लेना, कभी मां के चरण चूम के देख लेना, कितना मजा आता है मरने में यारों, कभी मुल्क के लिए मर के देख लेना,
लिख रहा हूं मैं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा मेरे लहू का हर एक कतरा, इंकलाब लाएगा मैं रहूं या न रहूं पर, ये वादा है मेरा तुझसे मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा
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मुझे तन चाहिए, ना धन चाहिए बस अमन से भरा यह वतन चाहिए जब तक जिंदा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए और जब मरूं तो तिरंगा ही कफन चाहिए
हम अपने खून से लिक्खें कहानी ऐ वतन मेरे करें कुर्बान हंस कर ये जवानी ऐ वतन मेरे
कभी वतन के लिए सोच के देख लेना, कभी मां के चरण चूम के देख लेना, कितना मजा आता है मरने में यारों, कभी मुल्क के लिए मर के देख लेना,
Bhagat Singh 115th Birth Aniversary
मैं भारतवर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूं यहां की चांदनी, मिट्टी का ही गुणगान करता हूं मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की तिरंगा हो कफन मेरा, बस यही अरमान रखता हूं
जमाने भर में मिलते हैं आशिक कई, मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता, नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं शासक कई, मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफन नहीं होता
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