लोग सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल होने, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करने, खादी को अपनाने, हिंदू-मुस्लिम एकता खड़ी करने, अस्पृश्यता से लड़ने और मद्यनिषेध के लिए प्रेरित करते।
जहां नमक बनाने की सुविधा नहीं थी, वहां 'ग़ैरक़ानूनी' नमक बेचकर कानून तोड़ा गया। हर कहीं नमक गोदामों पर धावा बोला गया तथा अवैध नमक के निर्माण का काम हाथों-हाथ लिया गया।
13 अप्रैल को गांधीजी ने महिलाओं की सभा को संबोधित करते हुए उन्हें भी राष्ट्रीय आन्दोलन में शामिल होने के लिए कहा। देखते ही देखते आन्दोलन में लाखों महिलाएं भी शामिल हो गयी थीं।
नमक-क़ानून को भंग करने के अपराध में जिनको सज़ाएं दी गईं उनमें राजाजी, मदनमोहन मालवीय, जे.एम.सेनगुप्त, बी.जी.खेर, के.एम.मुंशी, देवदास गांधी, महादेव देसाई और विट्ठलभाई पटेल आदि प्रमुख नेता थे।
"यदि भारत के लाखों गांवों के प्रत्येक गांव से दस आदमी आगे आएं और नमक क़ानून का उल्लंघन करें, तो आपके विचार से सरकार क्या कर सकती है? सत्य पर अटल रहे तो सत्याग्रहियों की कभी हार नहीं हो सकती।"
गांधीजी की गिरफ्तारी के बाद बड़ौदा के पूर्व-न्यायविद अब्बास तैयबजी ने गांधीजी के उत्तराधिकारी के रूप में सत्याग्रह का काम संभाला। तैयबजी के गिरफ्तारी के बाद सरोजिनी नायडू उनकी उत्तराधिकारिणी बनीं।