Online Learning Disadvantages: ऑनलाइन पढ़ाई के नुकसान, जानिए ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे क्यों हो रहे परेशान

By Careerindia Hindi Desk

Online Learning Disadvantages In Hindi: दुनिया भर में लॉकडाउन के चलते सभी स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है। भारत के स्कूलों में मार्च में परीक्षाएं हो जाती है और अप्रैल में फिर ने नयी कक्षाएं शुरू हो जाती है। लेकिन स्कूल बंद होने के कारण इस बार बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाई है। इस समस्या का खासकर प्राइवेट स्कूलों ने डिजिटल माध्यम से बच्चों को शिक्षा देने का उपाय निकाला। जिसमें ऑनलाइन क्लासेस वाट्सएप ग्रुप बना कर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। लेकिन इन माध्यमों में जो पठन सामग्री बनाई गयी है या भेजी जा रही है वो बच्चों को ध्यान में रखते हुए नहीं बनाई गई है।

 
Online Learning Disadvantages: ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे हो रहे परेशान, जानिए ऑनलाइन पढ़ाई के नुकसान

ऑनलाइन सीखने के बारे में तथ्य और आंकड़े

  • 6 मिलियन से अधिक छात्र वर्तमान में अपने उच्च शिक्षा कार्यक्रम के हिस्से के रूप में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में हैं।
  • ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में नामांकित सभी छात्रों में से लगभग आधे केवल दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से शिक्षित होते हैं।
  • 85% छात्र सोचते हैं कि ऑनलाइन सीखना पारंपरिक कक्षा के अनुभव के समान या बेहतर है।

ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के दस नुकसान (Disadvantages Of Online Classes In Hindi In Points)

उचित पाठ्य सामग्री का अभाव
ज्यादातर स्कूल पुराने अपलोडेड वीडियो जगह-जगह से उठाकर बच्चों को शेयर कर रहे है। सामग्री पाठ्यक्रम अनुरूप न होने के कारण इसे समझने में बच्चों को परेशानी हो रही है। वैसे तो देश के कई स्कूल ऑन लाइन पढ़ाई करवा रहे हैं। लेकिन तमाम स्कूल ऐसे भी हैं जो सुविधा सम्पन्न नहीं है, ऐसे में वो ऑनलाइन पढ़ाई करवा पाने में असमर्थ हैं। वैसे भी ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों के पास भी तो मोबाईल और लैपटॉप की व्यवस्था होनी जरूरी है। जब भारत में केवल 24% घरों तक ही इंटरनेट की उपलब्धता है तो ऑनलाइन शिक्षा की सार्थकता पर स्वयं सवाल उठ जाते हैं।

 

ऑनलाइन शिक्षा में दिक्कत
ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा से वंचित छात्रों के अभिवावकों का चिंतित होना स्वाभाविक है। असल में स्कूल प्रबंधन चाह रहा है कि लॉकडाउन के दौरान बच्चे शिक्षा से विमुख न हो। वो नयी क्लास के हिसाब से अपना पाठयक्रम पढ़े। ऑनलाइन पढ़ाई में कई व्यवाहारिक दिक्कतें भी हैं, लेकिन लाॅकडाउन में जब स्कूल खोलना खतरे से खाली नहीं है, ऐसे में ऑनलाइन क्लास ही बड़ा सहारा है। ऑनलाइन पढाई के दौरान घर में बच्चों को स्क्रीन पर घंटो बैठना पड़ रहा है। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उपकरण एवं इंटरनेट की समस्या
ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों का शिक्षा माध्यम अंग्रेजी है जिसे स्वंय से समझना इन बच्चों के लिए बहुत मुश्किल है। दूसरी बड़ी चुनौती इन बच्चों के ऑनलाइन क्लासेस के लिए आवश्यक संशाधनों का न होना है। ऑनलाइन क्लासेस के लिए एंड्रयाईड फोन/कम्प्यूटर/ टेबलेट, ब्राडबैंड कनेक्शन,प्रिंटर आिि की जरुरत होती है। ज्यादातर ग्रामीण बच्चों के परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होती उसके चलते उनके पास डिजिटल क्लासेस के लिए आवश्यक उपकरण नहीं होते हैं। जिसके कारण ये क्लास नहीं कर पा रहे जबकि इस समय इन बच्चों के क्लास के अन्य साथी ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से पढाई कर रहे हैं। गिनने लायक परिवार ही ऐसे होगें जिनके पास ये उपकरण उपलब्ध होंगे।

राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण रिपोर्ट
लोकल सर्कल नाम की एक गैर सरकारी संस्था ने एक सर्वे किया है जिसमें 203 ज़िलों के 23 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया। जिनमें से 43% लोगों ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस के लिए उनके पास कम्प्यूटर, टेबलेट, प्रिंटर, राउटर जैसी चीज़ें नहीं है। ग्लोबल अध्ययन से पता चलता है कि केवल 24% भारतीयों के पास स्मार्टफोन है। राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण रिपोर्ट 17-18 के अनुसार 11% परिवारों के पास डेस्कटॉप कंप्यूटर/ लैपटॉप/नोटबुक/ नेटबुक/ पामटॉप्स या टैबलेट हैं। इस सर्वे के अनुसार केवल 24% भारतीय घरों में इंटरनेट की सुविधा है, जिसमें शहरी घरों में इसका प्रतिशत 42 और ग्रामीण घरों में केवल 15% ही इंटरनेट सेवाओं की पहुँच है।

इंटरनेट की उपयोगिता
इंटरनेट की उपयोगिता भी राज्य भर राज्य अलग होती है जैसे दिल्ली, केरल, हिमाचल प्रिेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 40% से अधिक घरों में इंटरनेट का उपयोग होता है वही बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रिेश जैसे राज्यों में यह अनुपात 20% से कम है.स्कूलों द्वारा डिजिटल पढ़ाई के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाये जा रहे हैं और उसमें स्कूल रिकार्ड में बच्चों के दिए गए नंबरों को जोड़ा जा रहा है लेकिन इन बच्चों के पास फ़ोन ही नहीं है, रिकार्ड में जो नम्बर होते हैं वो परिवार के किसी बड़े के होते है. क्योंकि इन बच्चों के अपने फ़ोन तो होते नहीं हैं बल्कि कई बार ये भी होता है कि पूरे घर के लिए एक फ़ोन होता है और जिसका सबसे ज्यादा उपयोग परिवार का मुखिया करता है, या फोन में वाट्सएप ही नहीं है तो बच्चे कैसे पढ़ पायेंगे।

ग्रामीण इलाकों में दिक्कतें
एक दिक्कत नेटवर्क की भी सामने आ रही है. लॉकडाउन के कारण अभी इंटरनेट का उपयोग बहुत हो रहा है, जिसके चलते स्पीड कम हो गई है, इन बच्चों के परिवार के पास नेट प्लान भी कम राशि का होता है, जिससे नेट में बार-बार रुकावट आती है, पठन सामग्री डाउनलोड होने में ज्यादा समय ले रही है, क्वालिटी भी खराब होती है जिससे उसे पढ़ना और समझना बच्चों के लिए मुश्किल होता है. क्यू.एस. के सर्वे के अनुसार नेटवर्क की दिक्कत को देखें तो ब्रॉडबैंड/मोबाइल में सबसे ज्यादा प्रॉबलम खराब कनेक्टिविटी की ही आ रही है ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनुपलब्धता भी एक रुकावट है. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 2017-18 में गांवों किये सर्वेक्षण के आधार पर भारत के केवल 47% परिवारों को 12 घंटे से अधिक जबकि 33% को 9-12 घंटे बिजली मिलती है और 16% परिवारों को रोजाना एक से आठ घंटे बिजली मिलती है।

संस्थान के प्रबन्धन
हां, एक बात जरुर है कि निजी शिक्षा संस्थान अभिभावकों पर दबाव बनाकर इसका शुल्क वसूल कर रहे हैं। निजी स्कूलों ने अभिभावकों पर नयी पुस्तकें खरीदने और फिर फीस जमा करने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर भी अभिभावकों के द्वारा फीस का विरोध किया जा रहा है। मानव एवं संसाधन विकास मंत्रालय को यह विषय गंभीरता से लेना चाहिए। ये बात सही है कि संस्थान के प्रबन्धन को भी वेतन सहित अन्य खर्चे वहन करना पड़ रहे हैं किन्तु विद्यालय या महाविद्यालय में शिक्षण कार्य नही होने से काफी खर्च घटे भी होंगे। सरकार को समन्वय स्थापित करते हुए दोनों पक्षों के आर्थिक हित सुरक्षित रखने संबंधी प्रबंध करना चाहिए।

मानसिक और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं
इन सबके अलावा ऑनलाइन पढाई से बच्चों में आंखों में समस्या होने लगी है। यदि करने की शक्ति भी कम हो रही है। क्योंकि बच्चा हर चीज कंप्यूटर पर सेव कर लेता है। किताब से तो कोई पढ़ाई हो नहीं रही, जिसमें बच्चा यदि भी करे। शिक्षक मूल्यांकन के अभाव में बच्चे ऑनलाइन पाठ्यक्रम में उस रूचि से काम नहीं कर पा रहे जिस रूचि से वो विद्यालय में करते है। जिस तरह मोबाइल आने से हमें नंबर याद होना बंद हो गया है। उसी तरह से ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की मेमोरी लॉस हो रही है।

ऑनलाइन पढ़ाई किसके लिए फायदेमंद
मनोविश्लेषकों का मानना है कि ऑनलाइन पढ़ाई माध्यमिक कक्षा के बच्चों के लिए ठीक है, लेकिन कई प्ले स्कूल एवं प्रारंभिक स्कूलों द्वारा भी छोटे उम्र के बच्चों के लिए भी ऑनलाइन माध्यम से पाठ्यक्रम शुरू की गई है। ऐसे में अभिभावकों को विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है। बड़े उम्र के बच्चों पर भी नजर रखे जाने की जरूरत है। लॉकडाउन को एक साल से अधिक समय बीत चुका है। घरों में अधिकांश समय मोबाइल और लैपटॉप से चिपके रहने के कारण बच्चों की रचनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर बच्चों के मानसिक विकास पर होगा।

ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के दस नुकसान (Disadvantages Of Online Classes In Hindi In Points)
1. ऑनलाइन पढाई पर छात्र प्रतिक्रिया सीमित है।
2. ऑनलाइन पढ़ाई सामाजिक अलगाव का कारण बनता है।
3. ऑनलाइन पढ़ाई समय प्रबंधन कौशल में बाधक होती है।
4. ऑनलाइन पढ़ाई में संचार कौशल विकास का अभाव है।
5. ऑनलाइन पढ़ाई में धोखाधड़ी जैसी घटना अधिक होती है।
6. ऑनलाइन पढ़ाई में अभ्यास सिद्धांत कम होता है।
7. ऑनलाइन पढ़ाई में आमने-सामने संचार का अभाव है।
8. ऑनलाइन पढ़ाई कुछ विषयों तक ही सीमित होती है।
9. ऑनलाइन पढ़ाई कंप्यूटर निरक्षर आबादी में मुश्किल है।
10. ऑनलाइन पढ़ाई में शिक्षा मान्यता गुणवत्ता का अभाव है।

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English summary
Online Learning Disadvantages In Hindi: All schools have also been closed due to worldwide lockdown. Schools in India undergo exams in March and new classes start again in April. But due to the closure of the school, children have not been able to study this time. Private schools have devised a solution to this problem, especially through the medium of digital education. In which online classes are being taught to children by forming a WhatsApp group. But the reading material that is made or sent in these mediums is not designed keeping children in mind.Lack of proper course materialMost of the schools are picking up old uploaded videos from place to place and sharing the children. Children are having difficulty in understanding this because the content syllabus is not in conformity. By the way, many schools in the country are studying online. But there are also many schools which are not equipped with facilities, in which they are unable to study online. As it is, it is necessary for the children to have a system of mobiles and laptops as well for online studies. When the availability of internet is available to only 24% of the households in India, then the importance of online education itself raises questions.Problem in online educationIn such a situation, it is natural for parents of students deprived of online education to be concerned. In fact, the school management is wishing that the child should not be dissuaded from education during the lockdown. He should read his syllabus according to the new class. There are many practical problems in online education too, but in lockdown when the school is not open to danger, online class is a big support. During online studies, children in the house have to sit on the screen for hours. Children are facing many challenges while studying online.Equipment and internet problemThe medium of instruction for most private schools is English, which is difficult for these children to understand on their own. The second major challenge is the lack of necessary resources for these children's online classes. Online classes require Android phone / computer / tablet, broadband connection, printer etc. Most rural children do not have the necessary equipment for digital classes due to the financial condition of their families. Due to which they are not able to do classes, while at this time, other classmates of these children are studying through online classes. Only those families that can be counted will have these devices available.National Sample Survey ReportAn NGO called Local Circle has conducted a survey in which 23 thousand people from 203 districts took part. Out of which 43% said that they do not have computers, tablets, printers, routers for children's online classes. Global studies show that only 24% of Indians own a smartphone. According to the National Sample Survey Report 17-18, 11% of households have desktop computers / laptops / notebooks / netbooks / palmtops or tablets. According to this survey, only 24% of Indian households have internet access, with 42 per cent of it in urban households and only 15% in rural households having access to internet services.Internet utilityInternet usage is also different from state to state. In states like Delhi, Kerala, Himachal Pradesh, Haryana, Punjab and Uttarakhand, more than 40% of the households have access to the internet, whereas in states like Bihar, Chhattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh, this ratio. Less than 20%. Schools are creating WhatsApp groups for digital learning and adding the numbers given to children in school records but these children do not have a phone, the numbers that are in the records They are the elders of a family. Because these children do not have their own phones, but sometimes it is also the case that there is a phone for the whole house and which is most used by the head of the family, or there is no WhatsApp in the phone, then how will the children be able to read.Problems of children in rural areasA problem is also coming in front of the network. Due to the lockdown, there is a lot of internet usage, due to which the speed has reduced, the family of these children also have a low net plan, which causes frequent interruptions in the net, downloading of reading material. Taking too much time, the quality is also poor due to which it is difficult for children to read and understand. Q.S. According to the survey of the network, the biggest problem in broadband / mobile is the poor connectivity, the unavailability of electricity in rural areas is also a hindrance. Based on the survey conducted by the Ministry of Rural Development in villages in 2017-18, only 47% of the households in India get more than 12 hours while 33% get 9-12 hours of electricity and 16% of the households get one to eight hours of electricity daily.Institute ManagementYes, there is one thing that private education institutions are charging the parents by charging this fee. Private schools have issued notices to parents for purchasing new books and then depositing fees. Fees are also being opposed by parents on social media and WhatsApp. The Ministry of Human Resource Development should take this subject seriously. It is true that the management of the institute also has to bear other expenses including salary but due to lack of teaching work in the school or college, there will be a lot of expenses. The government should coordinate and make arrangements to safeguard the economic interests of both the parties.Mental and health problemsApart from all this, online studies have started causing problems in the eyes of children. If the power to do is also decreasing. Because the child saves everything on the computer. No studies are being done from the book, in which even if the child does it. In the absence of teacher evaluation, children are not able to work in online courses with the interest they do in school. The way the mobile has stopped, we have to remember the number. In the same way, children are losing their memory due to online studies.What to do now ??For whom is online education beneficial?Psychoanalysts believe that online learning is good for middle-class children, but many play schools and elementary schools have also introduced online medium courses for younger children as well. In such a situation, parents need to be especially vigilant. Children of older age also need to be monitored. More than a year has passed since the lockdown. The creative ability of children can be affected by sticking to mobiles and laptops for most of the time at home. Its direct effect will be on the mental development of children.
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