नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) प्लस सिस्टम कॉलेजों में फिजिकल एडमिशन रिपोर्टिंग आज से शुरू हो रही है। उम्मीदवारों को 13 अगस्त से 18 अगस्त के बीच अपने डॉक्यूमेंट्स का फिजिकल वेरिफिकेशन कराना होगा। यह प्रक्रिया Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) और Central Seat Allocation Board (CSAB) के सभी उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य है। अपनी सीट पक्की रखने और किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए, अलॉट किए गए कॉलेज की वेबसाइट पर जाकर ब्रांच-वाइज शेड्यूल जरूर चेक कर लें। समय पर रिपोर्ट न करने पर आपकी सीट कैंसिल भी हो सकती है।
कॉलेज कैंपस के लिए निकलने से पहले, छात्र अपने अलॉटेड इंस्टीट्यूट के पोर्टल पर लॉग इन जरूर कर लें। कई कॉलेजों में उम्मीदवारों को पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है और बची हुई फीस जमा करनी होती है। फीस पेमेंट की रसीद और रजिस्ट्रेशन फॉर्म को डाउनलोड करके उसका प्रिंटआउट अपने पास रख लें। इससे वेरिफिकेशन डेस्क पर आपका काफी समय बचेगा और पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

NIT+ कॉलेजों में फिजिकल रिपोर्टिंग के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स
उम्मीदवारों को अपने ओरिजिनल सर्टिफिकेट्स के साथ उनकी कम से कम दो सेल्फ-अटेस्टेड (स्व-सत्यापित) फोटोकॉपी सेट साथ ले जाने होंगे। जरूरी डॉक्यूमेंट्स में हाई स्कूल की मार्कशीट, JEE Main का एडमिट कार्ड और सीट अलॉटमेंट लेटर शामिल हैं। इसके अलावा, JoSAA के ऑफिशियल फॉर्मेट में बना वैलिड मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट ले जाना बिल्कुल न भूलें। इन सभी डॉक्यूमेंट्स को व्यवस्थित तरीके से रखने से वेरिफिकेशन सेंटर पर आपका काम बिना किसी रुकावट के आसानी से हो जाएगा।
रिजर्वेशन का लाभ उठाने के लिए कैटेगरी वाले उम्मीदवारों को अपने एक्टिव सर्टिफिकेट दिखाने होंगे। ध्यान रखें कि इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) सर्टिफिकेट 1 अप्रैल, 2026 के बाद का जारी होना चाहिए। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग नॉन-क्रीमी लेयर (OBC-NCL) के दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इसके साथ ही स्कूल से मिला ट्रांसफर और माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी साथ लाएं। सही और वैलिड सर्टिफिकेट पेश करना बेहद जरूरी है, क्योंकि फॉर्मेट में जरा सी भी गलती होने पर आपका अलॉटमेंट रद्द हो सकता है।
NIT+ कॉलेजों में फिजिकल रिपोर्टिंग के दौरान हॉस्टल अलॉटमेंट और हेल्पडेस्क
इस रिपोर्टिंग पीरियड के दौरान ही आमतौर पर कैंपस में हॉस्टल अलॉटमेंट और मेस रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी पूरी की जाती है। हॉस्टल के कमरे 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर दिए जाते हैं। अगर ऑनलाइन फीस पोर्टल पर कोई तकनीकी खराबी आती है, तो तुरंत कॉलेज के हेल्पडेस्क से संपर्क करें। समय रहते कदम उठाने से आपको कैंपस में रहने के लिए आसानी से कमरा मिल जाएगा और पेमेंट से जुड़ी दिक्कतें भी जल्दी हल हो जाएंगी।
13 से 18 अगस्त तक चलने वाली यह रिपोर्टिंग विंडो आपके एडमिशन के सफर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। छात्र अपनी यात्रा की प्लानिंग इस तरह करें कि वे रोजाना के तय समय (कट-ऑफ टाइम) से काफी पहले अपने अलॉटेड कैंपस पहुंच जाएं। किसी भी जरूरी अपडेट या शेड्यूल में बदलाव के लिए संबंधित कॉलेज के पोर्टल को रोज चेक करते रहें। पहले से की गई तैयारी आपकी इंजीनियरिंग कॉलेज लाइफ की शुरुआत को आसान और तनावमुक्त बना देगी।


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