वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे - भारत में हाईपर टेंशन की स्थिति

वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (विश्व उच्च रक्तचाप दिवस) की शुरुआत 'द वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग' द्वारा 2005 में, लोगों में हाई ब्लड प्रेशर को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। इस दिन को देश भर में 17 मई को मनाया जाता है। सभी देश मिलकर इस 'साइलेंट किलर' पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर को दुनिया भर में हृदय रोग और समय से पहले मृत्य का मुख्य कारण माना जाता है।

 

दुनिया भर में लगभग 1.39 बिलियन लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं और यह स्थिती आपको महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती है। हालांकि 5 में से एक ही व्यक्ति होता है जिसका ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है लेकिन बाकियों में इसका जोखिम बना रहता है। अब विश्व में हाइपरटेंशन के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। पहले इसके मामले केवल बड़ी उम्र/ वृद्ध लोगों में आम थे, लेकिन अब इसके कई मामले युवा पीढ़ी में भी देखने को मिलते हैं। यह खबर बेहद ही खतरनाक है क्योंकि ये कई जानलेवा बीमारियों का कारक है।

वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे - भारत में हाईपर टेंशन की स्थिति

वर्ल्ड हाइपटेंशन डे 2020 की थीम और उसका उद्देश्य

इस साल (2022) विश्व रक्तचाप दिवस की थीम है "अपने ब्लड प्रेशर को सही ढ़ग से मापें, नियंत्रित करें, लंबे समय तक जीवीत रहें।"
इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में सही ढंग से ब्लड प्रेशर को मापने के लिए जागरूकता बढ़ाना है। विश्व की 1 अरब से अधिक अबादी हाइ ब्लड प्रेशर से ग्रस्त मानी जाती है।

 

हाइपरटेंशन से होने वाली अन्य समस्याएं

जैसा की हमने अभी जाना की हाई ब्लड प्रेशर के लक्षणों पर अगर समय पर ध्यान ना दिया जाए तो ये कई अन्य समस्याओं का कराण बन जाता है और यह समस्याएं जानलेवा भी साबित होती है। हाई ब्लड प्रेशर से हृदय रोग, स्ट्रोक, डिमेंशिया और किडनी की बीमारी जैसी और अन्य बीमारीयां होने का भी बहुत खतरा होता है।

हाईपरटेंशन के सामान्य लक्षण और उपचार

डॉक्टर राजेश बुद्धिराजा के अनुसार- हमे हाइपरटेंशन के कुछ समान्य लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जैसे कि- सिरदर्द, थकान, नाक से खून आना, सीने में तकलीफ, सांस फुलना या सांस ना ले पाना, चिंता और गर्दन व सिर की नसों का धड़कना महसुस होना। हाई ब्लड प्रेशर आपकी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुचा सकता है अगर इसे बिना इलाज के ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो।

हाईपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर का कोई पूरा इलाज नहीं है लेकिन इसे उपचार से नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यह इस तरहा का रोग है कि नजरअंदाज करने पर ये अपको आईसीयू तक भी पहुंचा सकता है. हाई ब्लड प्रेशर में स्ट्रोक का खतरा हमेशा बना रहता है। इसका बेहतर उपाय यह है कि आप समय-समय पर आपना ब्लड प्रेशर चेक करें, वजन को नियंत्रण में रखें, नियमित रूप से व्यायाम करें, खाने में नमक का सेवन कम करें, तनाव कम ले, खाने में कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरपूर चीजों का सेवन ज्यादा करें। इस तरह से आप अपने ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल कर सकते है।

भारतीय में हाइपरटेंशन

भारत में लगभग 33% शहरी और 25% ग्रामीण लोग हाइपरटेंशन से ग्रस्त हैं। इन में से 25% ग्रामीण और 42% शहरी लोग अपने हाई ब्लड प्रेशर से अवगत है। इसमें केवल 25% ग्रामीण और 38% शहरी लोगों का ही हाइपरटेंशन का इलाज हो रहा है। हाइपरटेंशन ग्रामीण अबादी का दसवां हिस्सा और हाइपरटेंशन शहरी अबादी का पांचवां हिस्सा ही अपना ब्वड प्रेशर नियंत्रण में रख पाता है।

"द इंडिया हाइपरटेंशन कंट्रोल इनीशिएटिव (IHCI)" को हाइपरटेंशन के नियंत्रण पर प्राथमिक रूप से ध्यान देने के लिए लागू किया जा रहा है। जो की भारत के सीवीडी के लिए एक प्रमुख कारक है। यह योजना 18 राज्यों के 83 जिलों में शुरू की गई है और साथ ही देश में 14 लाख हाइपरटेंशन रोगियों का पंजीकरण किया गया है।
हाइपरटेंशन को उत्पाद सर्वे के द्वारा विर्धारित किया जा सकता। परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey-NFHS) ने पहला डेटा प्रदान किया जिसमें साल 2015-16 में 15-49 वर्ष की आयु वर्ग में महिलाओं में 8.8% और पुरुषों में 13.6% कि व्यापकता की सूचना है।

लोकसभा में हाइपरटेंशन/ हाई ब्लड प्रेशर (6 अगस्त 2021)

हमेशा से कहा जाता आया है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। हालांकि, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के हिस्से में कैंसर, मधुमेह, हृदय रोगों और स्ट्रोक की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रिय कार्यक्रम के तहत यह राज्यों और केंद्रप्रशासित प्रदेशो को तकनीकी और वित्तीय मदद प्रदान करता है। यह कार्यक्रम बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य संवर्धन और उसके रोकथाम के लिए जागरूकता पैदा करने, जल्द निदान, प्रबंधन और हाइपरटेंशन सहित दिए गए गैर-संचारी रोगों के इलाज के लिए उचित स्तर की स्वास्थ्य सुविधा के रेफरल पर केंद्रित है।

ओरल, ब्रेस्ट और सरवाइकल कैंसर, एनएचएम के तहत देश में आयुष्मान भारत - हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के तहत व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के एक हिस्से के रूप में शुरू किया गया है। इसके तहत 30 वर्ष से ज्यादा की आयु के व्यक्तियों को हाइपरटेंशन सहित सामान्य एनसीडी के लिए उनकी जांच की जाएगी।

सामुदायिक स्तर पर आयुष्मान भारत - स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के तहत व्यापक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से हाइपरटेंशन के निवारक पहलू को मजबूत किया जा रहा है। हाइपरटेंशन के जोखिम के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए और विश्व हाइपरटेंशन दिवस की निरंतर जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया का प्रयोग शामिल किया गया है। इसके अलावा, FSSAI के माध्यम से स्वस्थ भोजन को भी बढ़ावा दिया जाता है। फिट इंडिया आंदोलन को मिनिस्ट्री ऑफ युथ एंड स्पोर्ट्स द्वारा कार्यान्वित किया गया और साथ ही आयुष मंत्रालय द्वारा योगा से संबंधी अन्य गतिविधियां को बढ़ावा दिया जा रहा है और कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं।

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