Subhash Chandra Bose Speech नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भाषण

By Careerindia Hindi Desk

Subhash Chandra Bose Speech Jayanti Slogan Quotes In Hindi 2022 भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती हर साल 23 मार्च को मनाई जाती है। इस वर्ष 2022 में सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मनाई जा रही है। सुभाष चंद्र बोस जयंती 2022 के उपलक्ष्य पर दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड की तैयारी 23 जनवरी से शुरू होगी, जो पहले 24 जनवरी से शुरू होती थी। केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी से शुरू होगी और बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी 27 जनवरी तक मनाई जाएगी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ। सुभाष चंद्र बोस के पिता जानकीनाथ बोस पेशे से वकील थे और उनकी माता प्रभावती देवी धार्मिक व घरेलू महिला थी। सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही भारतीय स्वतंत्रता संग्रामों में हिस्सा लेते रहे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण की शिक्षाओं से प्रभावित थे। स्कूल कॉलेज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भाषण लेखन प्रतियोगिता का आयोजन जाता है। ऐसे में यदि आपको भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भाषण लिखना है तो करियर इंडिया आपके लिए सबसे बेस्ट नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर भाषण लिखने का आईडिया ड्राफ्ट लेकर आया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में महत्वपूर्ण तथ्यों की मदद से आप आसने से नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर भाषण लिख सकते हैं। तो आइये जानते हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भाषण कैसे लिखें।

 
Subhash Chandra Bose Speech नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भाषण

नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भाषण | Subhash Chandra Bose Speech
सबसे पहले मंच पर जाएं, मुख्य अतिथि, शिक्षकों, छात्रों और अन्य लोगों को प्रणाम करें। अपना परिचय दें... मेरा नाम लविश सांवरिया है, मैं कक्षा 12वीं का छात्र हूं। हम सब यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में यहां उपस्तिथ हुए हैं। अपना भाषण शुरू करें....

'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' नेता जी सुभाष बोस का यह नारा आज भी लोगों के दिलो दिमाग में बैठा हुआ है। उड़ीसा के एक छोटे से शहर कटक में 23 जनवरी 1897 को जन्में सुभाष चंद्र बोस ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित किया। नेताजी एक धनी और प्रमुख बंगाली वकील जानकीनाथ बोस के बेटे थे, बोस ने प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता से अपनी पढ़ाई की। लेकिन राष्ट्रवादी गतिविधियों के कारण उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था। उसके बाद उनके माता पिता ने उन्हें भारतीय सिविल सेवा की तैयारी के लिए इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भेजा। 1920 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की, लेकिन अप्रैल 1921 में उन्होंने भारत में चल रहे आंदोलनों के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया और भारत वापस आ गए।

 

नेताजी सुभाष बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस एक वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में राजनेता थे। भारत आने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए, जिसने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक शक्तिशाली अहिंसक संगठन बना दिया था। नेताजी को महात्मा गांधी ने बंगाल में एक राजनीतिज्ञ रंजन दास के अधीन काम करने की सलाह दी। नेताजी ने वहां एक युवा शिक्षक, पत्रकार और बंगाल कांग्रेस के स्वयंसेवकों के रूप में अपनी सेवाएं दी। लेकिन 1921 में उन्हें ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जब वह जेल से वापस आये तो 1924 में उन्हें कलकत्ता नगर निगम का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (महापौर) नियुक्त किया गया।

रंजन दास की मृत्यु के बाद बंगाल कांग्रेस में कई तरह की गड़बड़ी होने लगी तो सुभाष चंद्र बोस को बंगाल कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। इसके तुरंत बाद वह पंडित जवाहरलाल नेहरू के महासचिव बने। साथ में उन्होंने अधिक समझौता करने वाले, दक्षिणपंथी गांधीवादी गुट के खिलाफ पार्टी के अधिक उग्रवादी, वामपंथी गुट का प्रतिनिधित्व किया। इस बीच महात्मा गांधी ने जब 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया तो सुभाष चंद्र बोस को फिर से हिरासत में ले लिया गया। जब वह जेल में रहते हुए कलकत्ता के मेयर चुने गए।

हिंसक कृत्यों में अपनी संदिग्ध भूमिका के लिए उन्हें कई बार पुन: गिरफ्तार किया गया, लेकिन खराब स्वास्थ्य के लिए रिहा कर दिया गया। 1938 में नेताजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए और एक राष्ट्रीय योजना समिति का गठन किया, जिसने व्यापक औद्योगीकरण की नीति तैयार की। हालांकि, यह गांधीवादी आर्थिक विचार से मेल नहीं खाता था, जो कुटीर उद्योगों की धारणा से जुड़ा हुआ था।उन्होंने कट्टरपंथी तत्वों को रैली करने की उम्मीद में फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की, लेकिन जुलाई 1940 में उन्हें फिर से जेल में डाल दिया गया। उन्होंने आमरण अनशन किया, जिसने ब्रिटिश सरकार को रिहा करने के लिए बाध्य कर दिया था।

26 जनवरी 1941 को वह भेष बदलकर कलकत्ता से भाग गए और काबुल और मॉस्को होते हुए अंततः अप्रैल में जर्मनी पहुंच गए। जर्मनी में सुभाष चंद्र बोस भारत के लिए एक नव निर्मित विशेष ब्यूरो के संरक्षण में आए, जिसका मार्गदर्शन एडम वॉन ट्रॉट सोल्ज ने किया। वह और अन्य भारतीय जो बर्लिन में एकत्र हुए थे, उन्होंने जर्मन प्रायोजित आज़ाद हिंद रेडियो से जनवरी 1942 से अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, गुजराती और पश्तो में नियमित प्रसारण शुरू किया। लेकिन दक्षिण पूर्व एशिया पर जापानी आक्रमण के एक साल बाद, सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी छोड़ दिया, जर्मन और जापानी पनडुब्बियों और विमान से यात्रा करते हुए, वह मई 1943 में टोक्यो पहुंचे।

4 जुलाई को उन्होंने पूर्वी एशिया में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व संभाला और जापानी सहायता और प्रभाव के साथ, जापानी कब्जे वाले दक्षिण पूर्व एशिया में लगभग 40 हजार सैनिकों की एक प्रशिक्षित सेना बनाई। 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने एक अनंतिम स्वतंत्र भारत सरकार की स्थापना की घोषणा की और उनकी भारतीय राष्ट्रीय सेना (आजाद हिंद फौज), जापानी सैनिकों के साथ रंगून के लिए रवाना हुई और वहां से भारत में पहुंच गई। 18 मार्च 1944 को कोहिमा और इंफाल के मैदानी इलाकों में चले गए। जापान के आत्मसमर्पण की घोषणा के बाद सुभाष चंद्र बोस दक्षिण पूर्व एशिया जा रहे थे, तभी कथित तौर पर एक विमान दुर्घटना में ताइवान के एक जापानी अस्पताल में 18 अगस्त 1945 में उनका निधन हो गया।

धन्यवाद

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English summary
Subhash Chandra Bose Speech Jayanti Slogan Quotes In Hindi 2022 The birth anniversary of the great freedom fighter of India Netaji Subhash Chandra Bose is celebrated every year on 23 March. In this year 2022, the 125th birth anniversary of Subhas Chandra Bose is being celebrated. Preparations for the Republic Day Parade in Delhi on the occasion of Subhash Chandra Bose Jayanti 2022 will begin from January 23, which was earlier from January 24.
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